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ननंद भाभी का प्यार – Bhabhi Sex Story


नंद भाभी का प्यार – Bhabhi Ki Hot Kahani

गाव मैं रहती थी. मेरे बड़े भाई अंबाला मैं दुकान करते थे. अक्सर मैं चुट्टियो मैं भैया भाभी के पास शहर चली जाती थी.
एक बार जब मैं चुट्टियो मा बही भाभी के पास शहर गयी हुई थी तो भैया को अपने दुकानदारी के काम से 1 – 2 दिन के लिए कही बाहर जाना पड़ा . वैसे तो हम सब चाट पर अलग अलग सोते थे पर भैया के जाने के कारण भाभी ने मुझे अपने पास सुला लिया. हमने माक्चादानी लगा न्यू एअर थी. गर्मी का मौसम था और पंखा भी चल रहा था. मैं और भाभी साथ साथ लेती थी, मुन्ना हम दोनो के बीच मैल एटा था.
मुन्ना को सुलने के लिए भाभी ने अपनी नाइटी उपर उताई और अपना चुचा निकल कर मुन्ना को दूध पिलाने लगी. भाभी और मैं अक्सर एक दूसरे के सामने कपड़े बदल लेती थी, तो हम दोनो मैं पर्दे जैसे कोई चीज़ नही थी. मेरे सामने हे भाभी मुन्ना को दूध भी पिलाती थी तो मैने बहुत बार भाभी को आधी और पूरी नंगी देखा था और इसी वजह से यह मेरे लिए कोई नयी बात नही थी. भाभी ने नीचे चड्डी पहन न्यू एअर थी और मैं भी उके साथ लाती इधर उधर की बाते कर रही थी. मियने नोटीस किया की भाभी का एक इस्तन तो मुन्ना पे रहा था पर दूसरा वैसै बाहर निकला हुआ था और मैं उस्मआ से भी दूध तपाक रहा था.


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मैने भाभी से कहा- भाभी दूसरे इस्तन से भी दूध तपाक रहा है.
मैने भी बिना कुछ कहे, भाभी के इस्तन का निपल अपने होतो मैं लिया और धीरे से उसे चूसा. मेरे मूह मैं जैसे बारीक पानी की धार गिरी, मगर इसके सवद मैं थोड़ा फराक था, जो मुझे अगर कुछ खास अच्छा नही काग़ा तो बुरा नही लगा. मैं इससे पे सकती थी. मैने फिर से चूसा और फिर तो चुस्ती चली गयी. जैसे जैसे मैं भभू का इस्तन चूस रही थी, भाभी के मूह से हल्की हल्की सिसकारिया से निकल रही थी और वो मेरे बालो को सहला रही थी.
मैने भाभी का पूरा इस्तन अपने हाथ से पकड़ कर दबाया और उसके निपल को अपने सांतो मैं जाकड़ कर पूरे ज़ोर से चूसा. जितना मैं चुते , उतना दूध मेरे मूह मैं भर भर के आता. मैं बहुत सारा दूध पीना चाहती थी, पर मुन्ना बीच मैल एटा होने के कारण यह थोड़ा मुश्किल हो रहा था. भाभी ने मुन्ना को उठा कर अपने दूसरी तरफ लेता लिया और खुद मुझसे लिपट गयी, आब हम दोनो के बीच मैं कोई नही था.
मैने भी उनका साथ देना शुरू किया. पहले एक दूसरे के होठ चुस्ती रही, फिर जीभ, फिर पूरा चेहरा. उसके बाद भाभी मेरी गर्दन को चूमती हुई, गले से होती, मेरे इस्टानो तका आ गयी और मेरे बाए इस्तन का निपल अपने मूह मैं ले लिया. मेरे बदन मैं तो जैसे बिजलिया दौड़ रही थी. भाभी ने बड़े प्यार से मेरी चूची छूसी, कभी यह तो कभी वो, चूस्ते चूस्ते कई बार उन्होने मेरे इस्टानो पे काटा भी. जब भी मुझे माज़ा आता मेरे मूह से सिसकारी निकल जाती.
आब हम दोनो एक दूसरे की चुत सहला रही थी. जैसे जैसे उन्माद बढ़ता गया, सहलाना मसालने मैं बदल गया. फिर भाभी ने उंगली चोद कर अपना मूह हे मेरी चुत से लगा दिया और जो काम वो उंगली से कर रही थी वो अपनी जीभ से करने लगी. जब उनकी जीभ मेरी चुत मैं फिरी तो मैं अपने आप पे काबू ना रख सकी, कैसे मुझ पे कोई उन्माद सा छा रहा हो, मेरी आँखे बंद होने लगी और मैने भी अपना मूह उनकी चुत से सटा दिया.

मई भाभी की दोनो टॅंगो के बीच मैं बैठ गयी और फिर से अपना दया हाथ भाभी की चुत मैं घुसा घुसा कर उन्हे उतेज़ित करने लगी. भाभी तड़प रही थी और मैं यह देख के हैरान थी किड हीरे धीरे मेरा पतला सा हाथ सारा हे उनकी चुत मैं घुस गया था और उसके बावजूद भाभी बिना कोई दर्द महसूस किए मुझे से उछाल रही थी. आख़िर भाभी भी सखालित हो गयी, उन्होने मेरा हाथ अपनी जाँघो मैं बिंच लिया.
खीयार वो दिन और आज का दिन, यूयेसेस दिन से मैं भाभी की प्रेयसी बन गयी. जब भी मौका मिलता हम दोनो आपस मैं एससी हे कराती. मेरी शादी हुई, बाकछे हो गये, मगर हमारा ननद भाभी का प्यार आज भी कायम है.


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